Wednesday, 5 December 2018

किसी दिन कोई कवि बन

एक कविता बना,
मुझे कोई मेहसूस करता,
जैसे एक कवि,
मोहब्बत को शब्दों से सजाता,
लिखे जो बातें मैंने ,
उसकी वो मोहब्बत की,
कोई  मुझे भी याद कर,
आँसुओं से  रूबरू करता,
किसी दिन कोई कवि बन ,
मुझे भी कविता बना लिख देता,
ओढ के  दर्द  की चादर,
सर्द रात में, कोई शमा पे,
मेरा जिक्र करता
किसी दिन कोई कवि बन ,
मुझे भी कविता बना लिख देता,
खुबसूरती  का एहसास ,
पलकों से कराता,
लबों पे इकरार,
मोहब्बत समझाता,
किसी दिन कोई कवि बन ,
मुझे भी कविता बना लिख देता,
बिताए पल वो,
यादों में समेटता,
हवा में पैगाम,
वो इश्क का देता,
किसी दिन कोई कवि बन ,
मुझे भी कविता बना लिख देता,
लिख देता वो,
मोहब्बत का किस्सा हमरा,
यूहीं कोफी पे,
मेरा इन्तज़ार करना,
किसी दिन कोई कवि बन ,
मुझे भी कविता बना लिख देता
अटका के निगाहें,
निगाहों में,
वो अपना हाल-ए-दिल कहता,
कर के इज़हार-ए-इश्क,
किसी दिन कोई कवि बन ,
मुझे भी कविता बना लिख देता

Friday, 22 June 2018

शमा प्यार का

भीगा के पन्नों  को अश्कों से,
तुम्हें यादों से उतारा है ,
लिख कर दास्ताँ हमारी ,
मिलने को तुम्हें बुलाया है,
अब मौसम का मिज़ाज भी बदला है ,
सूरज भी जल्दी अस्त हुआ है ,
रात  का सफ़र अब थोड़ा  लम्बा है ,
मुलाकातों के लिए वक़्त हमें मिला है ,
नहीं रहेगी अब बातें अधूरी,
शमा पे चाँद देर तक ठहरा है ,
ओढ़ कर प्यार की चादर ,
तुमसे मिलने को  दिल तैयार बैठा है  ||


Sunday, 22 October 2017

ए हवा

ए हवा जरा इतना बता,
तू क्या कहती है,
जो लहू वो बहता है सरहद पर,
तू क्या नहीं उसे डरती है,
आखिर है वो घर तेरा,
जिसे वो बचा रहे,
सैनिक ही तो है, जो अपनी जान गवा रहे,
एक घर जो वो बचा रहे ,
एक घर जो वो उजाढ रहे,
आखिर किसी का लाल ही है जो क़ुर्बान हो रहे है,
एक घर सरहद के इस पार भी है,
एक घर सरहद के उस पार भी है,
जहां पर किसी की बूढ़ी माँ - तो किसी का बूढ़ा बाप,
भी अपने लाल की राह देख रहे है,
आँखे उनकी भी तरसती है,
तो कोई पापा कहने को भी तरस्ता है,
एक घर सुना वो भी होता है,
हवा तू क्यूं नहीं उन्हें बताती हैं,
मजहब तो तेरा कोई नहीं है,
तो उन्हें क्यू नहीं समझाती है,
तू वो पैगाम दे उन्हें जो बैठे खूर्सी पे जंग का एलान कर रहे,
पूंछ उनको उनके लाल के बारे में,
क्या कापती नहीं रूह उनकी लाल की मौत से,
जब दिवाली का दीपक जलता है,
तो कही किसी घर का चिराग भुजता है,
जब होली का रंग खेलते है,
तो कोई लहू से भी खेलता है,
तो कही किसी घर में कोई विधवा भी होता है,
वो घर भी त्यौहारों पे अपनों को दूंद्ता है,
सरहद पर तो मेरा जवान ही मरता है,
ए हवा जरा इतना बता,
क्यू तू चिंगारी को हवा देती है,
तू क्यू मज़हब के नाम पर लड़ने देती है,
तू क्यू नहीं थम थी जब आग लगती है,
तू चिराग भी भुजा देती है तू आग भी लगा देती है,
तू एक घर की फिर से याद दिलाती है,
जहाँ अक्सर गोली की चिक सुनाई देती है,
तू उन माँ और बाप की फिर आस तोड़ जाती है,
ए हवा तेरी कोई सरहद नहीं,
तो उस पार भी अमन और चैन का पैगाम पहुंचाती क्यू नहीं..!!

Tuesday, 12 September 2017

Judgemental World

Judge,
let them judge you,
for who you are,
they are there to only judge you,
whatever you do,
they will judge you.

The world is more or less is made only to Judge you,
let's not that make you change yourself,
you are beautiful in your own way,
no one is perfect in this world,
so are you.
Perfection is not to achieve,
perfection is what to look within,
if world would be so perfect,
I say people won't be crying for themselves.

Everyone is struggling.
Everyone is facing,
problems are made to make you,
problems aren't made to break you.

Remember, diamond and pebbles have the same quality,
but pressure is what makes the difference,
become the diamond with the flaw,
then the pebble with perfection,
and let the world Judge you.

Coz only true one will value the Diamond,
others will be busy collecting the pebbles.  

The drenched man

The drenched man,
with a wet shirt,
standing outside,
to feel the rain,
with every drop.
He is crying,
inside he is dying,
This world was cruel to him,
in rain he cried to avoid the pain,
a man cannot be emotional,
what the world tag,
just not to embrace,
he cry in rain,
Tell me what...
Is emotion what makes a man,
the heart which cries,
is strongest in the sense.